Shri Geeta Manas Book Cover श्री गीता मानस

पुस्तक के बारे में

श्री गीता मानस भगवद गीता का हिंदी काव्य रूपांतरण है। इसकी प्रारंभिक कल्पना 4 मई 2020 को हुई थी और इसका संक्षिप्त काव्य संस्करण 17 जून 2021 को (लघु गीता मानस नाम से) प्रकाशित हुआ। बाद में अनेक सुधारों के उपरांत पूर्ण काव्य रचना अपने शास्त्रीय रूप में 3 दिसंबर 2022 को प्रस्तुत की गई। आप जो पढ़ रहे हैं, वह मूल संस्कृत श्लोकों और उनकी हिंदी काव्यात्मक व्याख्याओं का अनूठा संगम है।

यद्यपि गीता का सार सामान्य गद्य या सरल व्याख्या से समझाया जा सकता है, परंतु गलत अर्थ निकालने का जोखिम बना रहता है। इस चुनौती को रोकने हेतु यहाँ अर्थ को मूल श्लोकों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है, जिससे स्पष्टता और प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है। प्रत्येक दोहा, चौपाई या छंद श्रीकृष्ण के उपदेशों के वास्तविक सार को प्रतिबिंबित करता है।

श्री गीता मानस का उद्देश्य केवल अनुवाद नहीं, बल्कि अर्थ और भावना—दोनों का संरक्षण है। पाठक यहाँ हिंदी काव्य रूप के साथ मूल संस्कृत श्लोक भी पाएँगे, जिससे उन्हें भक्ति, साहित्य और ज्ञान का समग्र अनुभव मिलेगा।

पुस्तक विवरण

लेखक: गोस्वामी रमेशानंद

भाषा: हिंदी

पृष्ठ: १४०

प्रकाशक: रवीना प्रकाशन ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड

प्रकाशन तिथि: ३० जून, २०२५

आईएसबीएन: ९७८-९३-५९३६-२२९-८

मूल्य: ₹२९९

मुख्य विशेषताएँ

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दर्शनीय छंद

“जब जब होवे धर्म की, हानि अधर्मुत्थान
तब तब ही भारत अहं, रचौं रूप आत्मान”